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  • शिक्षक बनना उतना आसान नहीं, जितना आम तौर पर समझा जाता है

    एक स्कूली बच्चे के जीवन में शिक्षक एक ऐसा प्रमुख इंसान होता है जो अपने ज्ञान, धैर्य, प्यार और देख-भाल से उसके पूरे जीवन को एक मजबूत आकार देता है। एक शिक्षक वो इंसान होता है जो अपने विद्यार्थी को सबसे बेहतरीन शिक्षा उपलब्ध कराने के द्वारा हरेक के भविष्य को आकार देता है। हर विद्यार्थी की शिक्षा में एक शिक्षक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। एक शिक्षक के पास बहुत सारे गुण होते हैं और वो अपने विद्यार्थी के जीवन को सफल बनाने में पूरी तरह से दक्ष होता है। एक शिक्षक न केवल बहुत समझदार होता है पर बहुत अच्छे से जानता है कि विद्यार्थी का ध्यान पढ़ाई की ओर कैसे लगाना है।

    आमतौर पर जब एक बच्चा स्कूल आता है तो उसके मन में कई प्रकार के डर होते हैं, जैसे कि स्कूल में अध्यापक जी मारेंगे और इस वजहसे वे बोलने में संकोच करते हैं। अतः एक अच्छे शिक्षक कि यही पहचान होती है जो आते ही बच्चों को अक्षर ज्ञान की घुट्टी न पिलाकर पहले उनकी शंका और झिझक दूर करता है। संक्छेप मे कहना का मतलब यह है कि शिक्षक ज्ञान, समृद्धि और प्रकाश का एक बड़ा स्रोत होता है जिससे कोई भी जीवनभर के लिये लाभ प्राप्त कर सकता है। वो हरेक के जीवन में वास्तविक प्रकाश के रुप में होते हैं क्योंकि वो जीवन में उनका रास्ता बनाने के लिये विद्यार्थियों की मदद करते हैं। वो किसी व्यक्ति के जीवन में प्रभु का दिया हुआ एक उपहार होते हैं जो बिना किसी स्वार्थ के हमें सफलता की ओर उन्मुख करते हैं। वास्तव में, शिक्षा के माध्यम से हमारे राष्ट्र के चकित कर देने वाले भविष्य के निर्माता के रुप में हम उन्हें बुला सकते हैं।

    जब भी हम समाज में शिक्षकों के योगदान की बात करते हैं तो बरबस हमें संत कबीर का यही दोहा याद आ जाता है। हमारे देश में गुरु-शिष्य परंपरा का बहुत गौरवशाली इतिहास रहा है। पहले जहां शिष्य स्वयं को गुरु के चरणों में अर्पित कर देते थे, वहीं गुरु भी शिष्य को केवल किताबी ज्ञान नहीं देते थे, बल्कि उसके संपूर्ण व्यक्तित्व को संवारकर उसे जीने की कला सिखाते थे। समय बदला, उसके साथ लोगों की जरूरतें भी बदलने लगीं। लिहाजा शिक्षा के क्षेत्र में भी बदलाव लाजिमी था। गुरुकुल की जगह अंग्रेजी माध्यम के पब्लिक स्कूलों ने ले ली। फिर भी सीखने और सिखाने की प्रक्रिया तो शाश्वत है, जो निरंतर चलती रहती है। चाहे हम कितने ही आधुनिक क्यों न हो जाएं पर शिक्षक और छात्र के रिश्ते में कई ऐसी बातें होती हैं, जो कभी नहीं बदलतीं।

    मजबूत बुनियाद ऊंची इमारत यह सच है कि परिवार बच्चे की पहली पाठशाला है और मां उसकी प्रथम शिक्षक।

    हम उन लाखों विद्यार्थीयों के भविष्य को गढ़ने तथा सहायता करने में अनगिनत शिक्षकों के द्वारा दिये गये योगदान का धन्यवाद और सम्मान करते है ।

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